किसानों की हत्या पर चुप हैं मोदी, उठे ऐसे सवाल। जानिए आखिर क्यों मोदी हैं इसपर अबतक चुप।

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गुरुवार को प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश की एक घटना पर दुख और संवेदना प्रकट की, लेकिन ये घटना लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा नहीं थी। वह राज्य के बाराबंकी ज़िले में हुई एक सड़क दुर्घटना पर अपनी संवेदना प्रकट कर रहे थे जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई।

द टेलीग्राफ़ में छपी इस रिपोर्ट में लिखा है,

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‘पांच दिन बीत चुके हैं लेकिन प्रधानमंत्री ने लखीमपुर खीरी की हिंसा, जिसमें किसानों को एसयूवी कार से कुचला गया, उस पर चुप्पी साधे हुए हैं।

इस घटना का आरोप उनकी सरकार के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर लगाया जा रहा है।’

पीएम मोदी ने किसानों की मौत पर कोई संवेदना पेश नहीं की

एक अन्य ट्वीट के ज़रिए प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में एक घर के ढह जाने से हुई मौतों पर भी दुख प्रकट किया, लेकिन लखीमपुर पर कोई ट्वीट तक नहीं आया।

गुरुवार को प्रधानमंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया,

”उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुए सड़क हादसे से दुखी हूं। जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं!”

गुरुवार को बाराबंकी के एक गांव में एक बस और बालू से भरे ट्रक के बीच हुई टक्कर में 15 लोगों की मौत हो गई और 21 लोग ज़ख़्मी हो गए।

इसके बाद पीएमओ ने ट्वीट के ज़रिए मृतकों के परिवार को दो लाख रुपये और हादसे में घायल हुए परिवार को 50 हज़ार रुपये के मुआवज़ा का एलान किया।

किसानों की मौत पर चुप्पी से उठे सवाल

लेकिन ये बयान लखीमपुर हिंसा में मारे गए लोगों के पाड़ित परिवारों को ‘नाराज़’ कर रहा है। वह पूछ रहे हैं कि,

”प्रधानमंत्री लखीमपुर की घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं और इसके अलावा हर घटना पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वो हिंसा जिसके लिए उनके ही गृह राज्य मंत्री ज़िम्मेदार है, उसे लेकर वह चुप हैं।”

टेलीग्राफ अख़बार के मुताबिक पीएम मोदी कहते हैं कि उनकी सरकार ”लोगों के उन तक पहुंचने का इंतज़ार नहीं करती, बल्कि ख़ुद लोगों तक पहुंचती है,” लेकिन लखीमपुर के पीड़ित परिवार पूछ रहे हैं कि क्यों मोदी और मोदी के मंत्री ”उन तक (पीड़ित परिवारों) नहीं पहुंच रहे हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जो दूसरा ट्वीट किया गया है वह कर्नाटक की एक दुर्घटना को लेकर है जिसमें वो लिखते हैं,

”कर्नाटक के बेलगाम में मकान ढहने से लोगों की मौत दुखद है. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं।”

सफाई में कह रहे हैं कि नेताजी के बेटे नहीं थे गाड़ी में

बीते रविवार को लखीमपुर खीरी में कार से प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंदा गया। आरोप है कि ये कार मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की है और इनमें से एक कार में उनके बेटे भी थे। हालांकि अजय मिश्रा टेनी का दावा है कि वह और उनके बेटे घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे।

अख़बार के मुताबिक़, इस घटना के बाद लखनऊ दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने इसे लेकर चुप्पी साधे रखी।

यही नहीं उत्तराखंड के ऋषिकेश में वह सत्ता में अपने 20 साल पूरे होने पर ख़ुद की ही पीठ थपथपाते दिखे।

उन्होंने कहा,

”मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राज्य के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का सफ़र तय करूंगा।

आज से ठीक 20 साल पहले मुझे लोगों की सेवा करने का एक नया मौका मिला था।”

7 अक्टूबर, 2001 को वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर गुजरात सीएम पद संभाला था।

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