पहले पुलिस ने मारी गोली, फिर Bijoy Baniya ने मुंह पे कूद कूद कर मार डाला, पुलिस देखती रही!

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Bijoy Baniya Assam Lynching Case

Bijoy Baniya | Assam Lynching Case: असम के दारंग जिले के सिपाझार सर्कल में बेदखली अभियान के दौरान हिंसा में दो लोगों की कथित तौर पर मौत और नौ पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद सोशल मीडिया पर भयावह दृश्य प्रसारित हुए। एनडीटीवी के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि कोई हताहत नहीं हुआ है।

पुलिस और अतिक्रमण विरोधी

Bijoy Baniya

“अतिक्रमण विरोधी” अभियान का नेतृत्व जिला प्रशासन की एक टीम ने किया था,
जिसमें कई पुलिसकर्मी दंगा गियर में और हथियार ले जा रहे थे।

एक वीडियो में कथित तौर पर पुलिस एक निहत्थे व्यक्ति पर गोली चालते हुए नज़र आई है जो अभियान का विरोध कर रहा है।

एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति कैमरा पकड़े हुए फोटोग्राफर के पीछे भागता दिख रहा है।

पुलिस के सामने फोटोग्राफर (Bijoy Baniya) ने की ऐसी हैवानियत

पुलिस ने उस व्यक्ति को डंडों से पीटा, जबकि फोटोग्राफर जमीन पर लेटते ही उसके शरीर पर कूद-कूदकर अपनी भड़ास निकाल दी।

जबकि ट्विटर के अनुभागों ने शुरू में अनुमान लगाया था कि कैमरा वाला व्यक्ति एक पत्रकार था,
उसकी पहचान दारांग प्रशासन जिले के एक फोटोग्राफर के रूप में हुई है, जो निष्कासन टीम के साथ था।

फोटोग्राफर का नाम बिजॉय बनिया (Bijoy Baniya) बताया जा रहा है। ये वडो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर जैसे इंसानियत पर कई सवाल से उठ रहे हैं।

एक व्यक्ति के शरीर पर यूँ कूदना पुलिस की मौजूदगी में तो कई सवाल खड़े करते हैं।
और ऐसी घटनाएं समाज की संवेदनशीलता पर कठोर प्रश्न है।

मुख्यमंत्री ने पुलिस के बचाव में रखी बात

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हिंसा के बाद गुवाहाटी में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा,

“पुलिस अपना कर्तव्य निभा रही है। मेरी जानकारी के अनुसार, लोगों ने पुलिस पर चाकू,
भाले और अन्य चीजों से हमला किया। बेदखली फिर से शुरू हो गई है [हिंसा के बाद] और कल भी जारी रहेगी।”

धर्म की आग फैल रही है तेज़ी से (Bijoy Baniya Case)

इसी तरह का एक “अतिक्रमण विरोधी” अभियान सोमवार को धौलपुर के गरुखुटी में हुआ था,
जहां लगभग 800 परिवारों को एक कृषि परियोजना के लिए सरकारी जमीन खाली करने के लिए बेदखल किया गया था।

मुस्लिम सामजसेवी और मोब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर मुखर हो कर आवाज़ उठाने वाले नदीम खान कटाक्ष करते हैं:

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों को निकाला जा रहा है, वे मुख्य रूप से बंगाली भाषी मुसलमान हैं।

सोशल मीडिया पर फैल रहा है आक्रोश!

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